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ToggleThe Logic Behind Mountain Sickness: रोहतांग और स्पीति पहुंचते ही कुछ लोगों की तबीयत क्यों बिगड़ जाती है?
कल्पना कीजिए।
सुबह आप मनाली की ठंडी हवा में आराम से नाश्ता कर रहे हैं। कुछ घंटों बाद आपकी गाड़ी रोहतांग पास की ऊंचाइयों पर पहुंच जाती है। चारों तरफ बर्फ से ढके पहाड़, बादलों से घिरी चोटियां और ऐसा नज़ारा जिसे देखकर कैमरा बार-बार निकालने का मन करे।
लेकिन तभी कुछ अजीब होने लगता है।
किसी को सिरदर्द शुरू हो जाता है। किसी को उल्टी जैसा महसूस होने लगता है। कुछ लोगों की सांस तेज चलने लगती है और कुछ लोग अचानक थकान महसूस करने लगते हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई बार ऐसा उन लोगों के साथ भी होता है जो पूरी तरह फिट होते हैं।
- तो आखिर ऐसा क्यों होता है?
- क्या इसकी वजह ठंड है?
- क्या पहाड़ों की यात्रा की थकान जिम्मेदार है?
- या फिर इसके पीछे कोई ऐसा वैज्ञानिक कारण छिपा है जिसे ज्यादातर लोग समझ ही नहीं पाते?
आज The Logic Root के इस लेख मे जानते है इसके पीछे का Logic।
Mountain Sickness क्या होती है?
Mountain Sickness एक ऐसी स्थिति है जो तब होती है जब हमारा शरीर अचानक अधिक ऊंचाई वाले इलाके में पहुंच जाता है और उसे वहां के वातावरण के अनुसार खुद को ढालने का पर्याप्त समय नहीं मिलता।
सरल भाषा में कहें तो समस्या पहाड़ों में नहीं होती, समस्या हमारे शरीर की तैयारी में होती है।
हमारा शरीर समुद्र तल या कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने का आदी होता है। जैसे ही हम अचानक 3000 मीटर, 4000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर पहुंचते हैं, शरीर को नई परिस्थितियों के अनुसार काम करना पड़ता है।
कुछ लोगों का शरीर जल्दी Adapt कर लेता है, जबकि कुछ लोगों को Mountain Sickness का सामना करना पड़ता है।
रोहतांग या स्पीति पहुंचते ही कुछ लोगों को चक्कर क्यों आने लगते हैं?
मान लीजिए दो दोस्त एक ही गाड़ी में मनाली से रोहतांग पास जा रहे हैं। दोनों ने एक जैसा खाना खाया। दोनों की उम्र लगभग समान है। दोनों स्वस्थ भी हैं।
लेकिन रोहतांग पहुंचने के बाद एक दोस्त आराम से फोटो खींच रहा है जबकि दूसरा सिर पकड़कर बैठा है।
ऐसा क्यों?
क्योंकि Mountain Sickness सिर्फ आपकी उम्र या Fitness पर निर्भर नहीं करती। यह इस बात पर निर्भर करती है कि आपका शरीर ऊंचाई के साथ कितनी तेजी से खुद को ढाल पाता है।
कुछ लोगों का शरीर नई परिस्थितियों को जल्दी स्वीकार कर लेता है जबकि कुछ लोगों को अधिक समय चाहिए होता है। यही कारण है कि एक ही परिवार में कुछ लोग बिल्कुल सामान्य रहते हैं और कुछ लोग परेशान हो जाते हैं।
असली खेल Oxygen का नहीं, उसके Pressure का है
अधिकांश लोग मानते हैं कि पहाड़ों पर Oxygen कम हो जाती है। यहीं सबसे बड़ा भ्रम पैदा होता है। सच्चाई यह है कि हवा में Oxygen का प्रतिशत लगभग वही रहता है।
फिर समस्या कहां है? समस्या हवा के Pressure में है।
ऊंचाई बढ़ने के साथ Atmospheric Pressure कम होने लगता है। इसका मतलब यह है कि हर सांस के साथ आपके फेफड़ों तक पहुंचने वाली Oxygen की मात्रा कम हो जाती है।
यानी आप उतनी ही सांस ले रहे हैं जितनी मैदानों में लेते थे, लेकिन शरीर को मिलने वाली Oxygen कम हो जाती है। यहीं से Mountain Sickness की शुरुआत होती है।
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए
कल्पना कीजिए कि आपके घर की पानी की टंकी से आने वाला Pressure अचानक आधा हो जाए। नल खुला रहेगा, लेकिन पानी पहले जितना नहीं आएगा।
ठीक यही चीज Oxygen के साथ होती है। सांस तो चल रही होती है, लेकिन शरीर को जरूरत के मुताबिक Oxygen नहीं मिल पाती।
रोहतांग की तरफ बढ़ते समय शरीर के अंदर क्या चल रहा होता है?
| यात्रा का पड़ाव | शरीर के अंदर क्या हो रहा होता है? |
| मनाली | सब कुछ सामान्य |
| गुलाबा | शरीर Adapt होना शुरू करता है |
| मढ़ी | सांसें थोड़ी तेज हो सकती हैं |
| रोहतांग पास | Oxygen की कमी का असर महसूस होने लगता है |
| संवेदनशील व्यक्ति | सिरदर्द, चक्कर या थकान |
यानी जब आप पहाड़ों की खूबसूरती देख रहे होते हैं, तब आपका शरीर भी अपने स्तर पर एक बड़ी लड़ाई लड़ रहा होता है।
Altitude बढ़ने पर शरीर में क्या बदलाव आते हैं?
- सांस तेज हो जाती है: शरीर ज्यादा Oxygen लेने की कोशिश करता है।
- दिल तेजी से धड़कने लगता है: Heart शरीर के हर हिस्से तक Oxygen पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करता है।
- ऊर्जा जल्दी खत्म होने लगती है: जो काम मैदानों में आसान लगता है, वही पहाड़ों पर कठिन महसूस हो सकता है।
- शरीर Adaptation Mode में चला जाता है: धीरे-धीरे शरीर खुद को नई परिस्थितियों के अनुसार ढालने की कोशिश करता है।
Mountain Sickness के सबसे आम लक्षण
हर व्यक्ति में लक्षण अलग हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर ये संकेत दिखाई देते हैं:
- सिरदर्द
- चक्कर आना
- उल्टी जैसा महसूस होना
- उल्टी होना
- अत्यधिक थकान
- सांस फूलना
- कमजोरी महसूस होना
- भूख कम लगना
- नींद न आना
अगर ये लक्षण लगातार बढ़ रहे हों तो उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।
अगर पहाड़ों पर Oxygen कम है तो वहां के लोग आराम से कैसे रहते हैं?
यह शायद सबसे दिलचस्प सवाल है।
अगर रोहतांग या स्पीति आने वाले पर्यटक बीमार पड़ सकते हैं, तो वहां रहने वाले लोग सामान्य जीवन कैसे जी लेते हैं?
कारण है वर्षों की Adaptation। उनका शरीर बचपन से ही ऐसे वातावरण में रहता है। समय के साथ उनका शरीर Oxygen का बेहतर उपयोग करना सीख जाता है। यही वजह है कि पहाड़ों में रहने वाले लोग अक्सर ऊंचाई पर ज्यादा सहज महसूस करते हैं।
यदि आपको यह विषय रोचक लग रहा है, तो हमारा लेख “पहाड़ों में लोग ज्यादा स्वस्थ क्यों रहते हैं?” भी जरूर पढ़ें। वहां हमने इसी Logic को और विस्तार से समझाया है।
रोहतांग पास और स्पीति में यह समस्या ज्यादा क्यों देखने को मिलती है?
रोहतांग पास और स्पीति दोनों ही ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं। समस्या तब बढ़ती है जब लोग बहुत कम समय में काफी अधिक ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं। कई पर्यटक सुबह मनाली में होते हैं और कुछ ही घंटों में रोहतांग या उससे आगे पहुंच जाते हैं।
शरीर को Adapt होने का समय ही नहीं मिलता।
अगर आप यात्रा की योजना बना रहे हैं तो Rohtang Pass Weather in June वाला हमारा विस्तृत लेख भी पढ़ सकते हैं, जिससे मौसम और यात्रा की तैयारी को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
Mountain Sickness और Motion Sickness में क्या अंतर है?
बहुत से लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं।
Mountain Sickness | Motion Sickness |
ऊंचाई की वजह से होती है | वाहन की गति की वजह से |
Oxygen Pressure से जुड़ी होती है | दिमाग और संतुलन प्रणाली से जुड़ी होती है |
रोहतांग, स्पीति जैसी जगहों पर आम | बस, कार, नाव कहीं भी हो सकती है |
Myth Vs Reality
Myth | Reality |
सिर्फ बुजुर्ग लोगों को होती है | किसी को भी हो सकती है |
फिट लोग हमेशा सुरक्षित रहते हैं | Fitness इसकी गारंटी नहीं है |
यह सिर्फ थकान है | यह शरीर की वास्तविक प्रतिक्रिया है |
Oxygen Support की जरूरत नहीं पड़ती | गंभीर स्थिति में जरूरी हो सकती है |
निष्कर्ष: पहाड़ों की खूबसूरती के पीछे छिपा विज्ञान
अगली बार जब आप रोहतांग पास, स्पीति या किसी ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में जाएं और किसी पर्यटक को सिर पकड़कर बैठे देखें, तो समझिए कि यह सिर्फ थकान नहीं भी हो सकती।
हो सकता है उसका शरीर हवा में मौजूद Oxygen से नहीं, बल्कि उसके Pressure में आए बदलाव से संघर्ष कर रहा हो।
पहाड़ सिर्फ खूबसूरत नहीं होते, वे हमें विज्ञान का एक शानदार पाठ भी पढ़ाते हैं।
और शायद यही वजह है कि जितना हम पहाड़ों को समझते हैं, उतना ही उनसे प्यार करने लगते हैं।
The Logic Lab FAQs
Q.1 क्या Mountain Sickness जानलेवा हो सकती है?
गंभीर मामलों में यह खतरनाक हो सकती है, इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Q.2 Mountain Sickness कितनी ऊंचाई पर शुरू हो सकती है?
आमतौर पर 2500 मीटर से ऊपर कुछ लोगों में इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
Q.3 क्या बच्चों को भी Mountain Sickness हो सकती है?
हां, बच्चों को भी यह समस्या हो सकती है।
Q.4 क्या Oxygen Cylinder साथ रखना जरूरी है?
हर स्थिति में नहीं, लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह उपयोगी साबित हो सकता है।
Q.5 क्या Mountain Sickness अपने आप ठीक हो जाती है?
हल्के मामलों में शरीर Adapt कर सकता है, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

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